गोवर्धन पूजा-पूजन के लिए आज का दिन अत्यंत शुभ जाने कथा पूजन विधि

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गोवर्धन पूजा-पूजन के लिए आज का दिन अत्यंत शुभ जाने कथा पूजन विधि

नई दिल्ली / हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा का पावन पर्व मनाया जाता है, जो दीपावली के अगले दिन पड़ता है। लेकिन इस वर्ष अमावस्या तिथि दो दिनों तक रहने के कारण लोगों में यह संशय है कि गोवर्धन पूजा किस दिन की जाए। ऐसे में अगर आप भी इस उलझन में हैं, तो आइए जानते हैं कि इस साल गोवर्धन पूजा का सही तिथि क्या है। यहां जानिए गोवर्धन पूजा की तारीख, विधि, शुभ मुहूर्त, कथा, मंत्र, आरती सहित अन्य जानकारी

पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि इस वर्ष 21 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर 22 अक्टूबर की रात 8 बजकर 16 मिनट तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के आधार पर गोवर्धन पूजा का पर्व 22 अक्टूबर 2025, दिन बुधवार को मनाया जाएगा।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष गोवर्धन पूजा के लिए प्रातःकाल का शुभ मुहूर्त सुबह 06:26 से 08:42 तक रहेगा। इस समय में पूजा करना अत्यंत शुभ माना गया है। वहीं सायाह्नकालीन मुहूर्त दोपहर 03:29 बजे से शाम 05:44 बजे तक रहेगा।

विष्णु पुराण में गोवर्धन पूजा के महत्व का वर्णन मिलता है. बताया जाता है कि देवराज इंद्र को अपनी शक्तियों पर अभिमान हो गया था और भगवान श्री कृष्ण इंद्र के अहंकार को चूर करने के लिए एक लीला रची थी. इस कथा के अनुसार एक समय गोकुल में लोग तरह-तरह के पकवान बना रहे थे और हर्षोल्लास के साथ गीत गा रहे थे. यह सब देखकर बाल कृष्ण ने यशोदा माता से पूछा कि, आप लोग किस उत्सव की तैयारी कर रहे हैं. कृष्ण से सवाल पर मां यशोदा ने कहा कि, हम देवराज इंद्र की पूजा कर रहे हैं. माता यशोदा के जवाब पर कृष्ण ने फिर पूछा कि हम इंद्र की पूजा क्यों करते हैं. तब यशोदा मां ने कहा कि, इंद्र देव की कृपा से अच्छी बारिश होती है और अन्न की पैदावार होती है, हमारी गायों को चारा मिलता है. माता यशोदा की बात सुनकर कृष्ण ने कहा कि, अगर ऐसा है तो हमें गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए. क्योंकि हमारी गाय वहीं चरती है, वहां लगे पेड़-पौधों की वजह से बारिश होती है. श्री कृष्ण की बात मानकर सभी गोकुल वासियों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कर दी.  यह सब देख देवराज इंद्र क्रोधित हो गए और अपने इस अपमान का बदला लेने के लिए मूसलाधार बारिश शुरू कर दी. प्रलयकारी वर्षा देखकर सभी गोकुल वासी घबरा गए. इस दौरान भगवान श्री कृष्ण ने अपनी लीला दिखाई और गोवर्धन पर्वत को छोटी सी उंगली पर उठा लिया और समस्त ग्राम वासियों को पर्वत के नीचे बुला लिया. यह देखकर इंद्र ने बारिश और तेज कर दी लेकिन 7 दिन तक लगातार मूसलाधार बारिश के बावजूद गोकुल वासियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा. इसके बाद इंद्र को अहसास हुआ कि मुकाबला करने वाला कोई साधारण मनुष्य नहीं हो सकता है. इंद्र को जब यह ज्ञान हुआ कि वह भगवान श्री कृष्ण से मुकाबला कर रहा था, इसके बाद इंद्र ने भगवान श्री कृष्ण से क्षमा याचना की और स्वयं मुरलीधर की पूजा कर उन्हें भोग लगाया. इस पौराणिक घटना के बाद से गोवर्धन पूजा की शुरुआत हुई।

गोवर्धन पूजा के लिए सबसे पहले घर के आंगन या मुख्य दरवाजे के पास गोबर से लीप कर गोवर्धन भगवान की आकृति बनाएं। इसके साथ ही गाय और बैल की छोटी-छोटी आकृतियां भी बनाएं। फिर पूजा में रोली, चावल, बताशे, पान, खीर, जल, दूध, फूल आदि अर्पित करें। उसके बाद दीपक जलाएं। पूजा के दौरान गोवर्धन भगवान की परिक्रमा करें। उसके बाद आरती करें और आखिरी में भोग लगाकर प्रसाद को सभी में बांटें।

पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।

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