Chhattisgarh News: रायपुर में अत्याधुनिक BSL-3 प्रयोगशाला से संक्रामक रोगों पर अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले—जैव-सुरक्षा, वैज्ञानिक नवाचार और ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण को मिलेगा बढ़ावा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में वैज्ञानिक अनुसंधान और जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र को मजबूती देने की दिशा में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर परिसर में स्थापित अत्याधुनिक बायोसेफ्टी लेवल-3 (BSL-3) प्रयोगशाला महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह सुविधा संक्रामक रोगों की पहचान, उनके वैज्ञानिक अध्ययन और रोकथाम से जुड़े अनुसंधान को नई दिशा देगी। इससे वैक्सीन, उपचार और उन्नत जांच तकनीकों के विकास से संबंधित शोध को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

संक्रामक रोगों की निगरानी और शोध को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि एवं पशुपालन छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार हैं। ऐसे में पौधों, पशुओं और मानव स्वास्थ्य से जुड़े संक्रामक रोगों पर वैज्ञानिक अध्ययन के लिए आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं का होना विशेष महत्व रखता है।

उन्होंने कहा कि इस प्रयोगशाला में उच्च जैव-सुरक्षा मानकों के अनुरूप नियंत्रित वातावरण उपलब्ध होगा। इससे वैज्ञानिकों और शोधार्थियों को संक्रामक रोगजनकों के अध्ययन तथा रोगों की पहचान और रोकथाम से जुड़े अनुसंधान के अवसर मिलेंगे।

जूनोटिक रोगों के अध्ययन में मिलेगी मदद

BSL-3 प्रयोगशाला की एक प्रमुख उपयोगिता पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले जूनोटिक रोगों के अध्ययन और निगरानी से जुड़ी है। ऐसी सुविधाएं संबंधित अनुसंधान, रोगों की शीघ्र पहचान और संभावित प्रकोपों से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने में सहायक हो सकती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सुविधा से कृषि जैव-प्रौद्योगिकी, पशु स्वास्थ्य और संक्रामक रोग अनुसंधान के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।

‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण को मिलेगा समर्थन

मुख्यमंत्री साय ने मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण के आपसी संबंधों पर आधारित ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण को महत्वपूर्ण बताया। इस अवधारणा के तहत स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को व्यापक रूप से समझने और उनका समाधान खोजने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वय पर जोर दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि बीएसएल-3 प्रयोगशाला इस दिशा में अनुसंधान और रोग निगरानी की क्षमताओं को मजबूत करने में उपयोगी साबित हो सकती है। इससे कृषि और पशुपालन क्षेत्र से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर वैज्ञानिक समाधान विकसित करने के प्रयासों को भी गति मिलेगी।

28 सितंबर को हुआ था प्रयोगशाला का लोकार्पण

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी द्वारा नवनिर्मित सुभाषचंद्र बोस बायोटेक इन्क्यूबेशन सेंटर के अंतर्गत इस बीएसएल-3 प्रयोगशाला की स्थापना की गई है। इसका लोकार्पण 28 सितंबर को किया गया था।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति एवं छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. गिरीश चंदेल के प्रयासों की सराहना की और उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

विश्वविद्यालय की अनुसंधान क्षमता होगी मजबूत

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय कृषि अनुसंधान, जैव-प्रौद्योगिकी और आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं के विकास में योगदान दे रहा है। विश्वविद्यालय की फाइटोसैनिटरी प्रयोगशाला कृषि नमूनों, मिट्टी, जल, फसल अवशेषों और अन्य नमूनों के परीक्षण एवं अनुसंधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

नई बीएसएल-3 सुविधा से विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक अनुसंधान क्षमता को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही वैज्ञानिकों, शोधार्थियों, प्रयोगशाला तकनीशियनों और संबंधित विशेषज्ञों को उच्च जैव-सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण तथा अनुसंधान के अवसर मिल सकेंगे।

मुख्यमंत्री के अनुसार, आधुनिक वैज्ञानिक सुविधाओं का विस्तार राज्य में कुशल मानव संसाधन विकसित करने और अनुसंधान के नए अवसर तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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