अपराध क्रमांक 03/2024 में विवेचना पूरी होने के बाद अभियोग पत्र पेश करने की तैयारी, 28 सितंबर को हो चुकी है पूछताछ
रायपुर, 3 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ के चर्चित कोल लेवी प्रकरण में भिलाई नगर से कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव को आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एसीबी की ओर से नया नोटिस जारी किया गया है। नोटिस के मुताबिक उन्हें 5 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:30 बजे रायपुर की विशेष अदालत में उपस्थित होने के लिए कहा गया है। यह मामला अपराध क्रमांक 03/2024 से संबंधित बताया गया है।
विवेचना पूरी, अब अदालत में पेश होगा अभियोग पत्र
जांच एजेंसी के नोटिस में कहा गया है कि मामले की विवेचना पूरी होने के बाद विशेष न्यायालय, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, जिला रायपुर के समक्ष अभियोग पत्र प्रस्तुत किया जाना है। नोटिस में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 7A और 12 के साथ IPC की धारा 420, 120-B, 384, 467, 468 और 471 का उल्लेख किया गया है।
28 सितंबर को EOW कार्यालय में हुई थी पूछताछ
नए नोटिस से पहले 28 सितंबर 2026 को देवेंद्र यादव से रायपुर स्थित EOW कार्यालय में पूछताछ की गई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उनसे दो घंटे से अधिक समय तक सवाल-जवाब हुआ था। इसके बाद अब जांच एजेंसी ने विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र पेश करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है।
करीब 540 करोड़ रुपये की कथित अवैध वसूली से जुड़ा मामला
यह प्रकरण छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन से जुड़ी कथित अवैध लेवी वसूली के मामले से संबंधित है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई और विभिन्न रिपोर्टों में इस मामले में करीब 540 करोड़ रुपये की कथित अवैध वसूली का उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी के आरोपों और सामने आए तथ्यों का अंतिम परीक्षण न्यायालय में होना है।
नोटिस में कई गंभीर धाराओं का उल्लेख
EOW/ACB के नोटिस में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के साथ IPC की विभिन्न धाराओं का उल्लेख किया गया है। नोटिस में धारा 170 CrPC के तहत विशेष न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित करने की बात भी सामने आई है।
5 अक्टूबर को होगी अगली अहम कार्रवाई
अब 5 अक्टूबर 2026 को विशेष अदालत में देवेंद्र यादव की उपस्थिति और अभियोग पत्र पेश किए जाने की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। जांच एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया का विषय हैं। किसी व्यक्ति को नोटिस जारी होना या जांच में उसका नाम आना अपने आप में अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं है; मामले में अंतिम निर्णय अदालत की कार्यवाही के बाद होगा।






























