17 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकारी अस्पतालों के विशेषज्ञ चिकित्सकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल

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तीन दिनों से ओपीडी और वार्ड सेवाएं प्रभावित, सोमवार से आपातकालीन सेवाएं बंद करने की चेतावनी

रायगढ़। जिले के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अपनी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। चिकित्सकों का आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। हड़ताल के कारण अस्पतालों में ओपीडी और वार्ड सेवाएं प्रभावित हैं, जिससे इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि मांगों को लेकर शासन स्तर पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। ऐसे में आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया गया है।

जेआर, एसआर से लेकर एमओ और एमबीबीएस चिकित्सक आंदोलन में शामिल

इस आंदोलन में जूनियर रेजिडेंट (जेआर), सीनियर रेजिडेंट (एसआर), पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी), मेडिकल ऑफिसर (एमओ) सहित एमबीबीएस चिकित्सक शामिल हैं। चिकित्सकों का कहना है कि वे लंबे समय से 17 सूत्रीय मांगों को लेकर शासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं, लेकिन मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें काम बंद आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।

तीन दिनों तक जारी रखी गई इमरजेंसी सेवा

हड़ताल के दौरान मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने पिछले तीन दिनों तक आपातकालीन सेवाओं को जारी रखा। उनका कहना है कि आंदोलन के बावजूद उनकी प्राथमिकता गंभीर मरीजों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना रही है। हालांकि, मांगों पर शासन की ओर से सकारात्मक पहल नहीं होने के कारण अब आंदोलन को अगले चरण में ले जाने की तैयारी है।

सोमवार से इमरजेंसी सेवा भी बंद करने की चेतावनी

चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो सोमवार से आपातकालीन सेवाएं भी बंद कर दी जाएंगी। इसके अलावा चिकित्सक अलग-अलग तरीकों से प्रदर्शन कर शासन और प्रशासन का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित कर रहे हैं। आपातकालीन सेवाओं के बंद होने की स्थिति में सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य व्यवस्था पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।

मरीजों की बढ़ी परेशानी

हड़ताल के चलते नियमित जांच, फॉलो-अप और वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूरदराज के क्षेत्रों से सरकारी अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को उपचार और चिकित्सकीय परामर्श के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। यदि आपातकालीन सेवाएं भी बंद होती हैं तो गंभीर मरीजों के सामने इलाज की चुनौती और बढ़ सकती है।

मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात

आंदोलनरत चिकित्सकों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं और जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। चिकित्सकों ने शासन से जल्द बातचीत कर समस्या का समाधान निकालने की मांग की है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार और प्रशासन की ओर से इस आंदोलन को समाप्त कराने के लिए क्या पहल की जाती है।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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