करीब एक सप्ताह से चाल्हा-बताती क्षेत्र में भटक रहा था 2 से 3 साल का शावक, झुंड से मिलाने की कोशिश रही नाकाम
धरमजयगढ़। वनमंडल धरमजयगढ़ के बोरो रेंज में पिछले कई दिनों से अपने झुंड से अलग होकर विचरण कर रहे हाथी के नन्हे शावक को वन विभाग की टीम ने सोमवार को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। शावक को उसके झुंड से मिलाने के लिए वन अमले ने लगातार प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिलने के बाद विशेषज्ञों की मदद से उसे सुरक्षित स्थान पर भेजने का निर्णय लिया गया।
जानकारी के मुताबिक शावक को सरगुजा क्षेत्र स्थित रमकोला अभयारण्य भेजा गया है। यहां उसके बेहतर उपचार, नियमित निगरानी, देखभाल और सुरक्षा की व्यवस्था उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
चाल्हा-बताती के बीच कई दिनों से था शावक का डेरा
बताया जा रहा है कि करीब 2 से 3 वर्ष की उम्र का हाथी शावक बोरो रेंज के चाल्हा और बताती गांव के बीच पिछले करीब एक सप्ताह से अकेले घूम रहा था। कभी वह जंगल के भीतर तो कभी आबादी के आसपास नजर आता था। शावक के लगातार अकेले विचरण करने से ग्रामीणों में भी चिंता बनी हुई थी।
मामले की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी। विभागीय अमला यह पता लगाने में जुटा था कि शावक का झुंड आसपास कहां मौजूद है, ताकि उसे सुरक्षित तरीके से वापस परिवार के बीच पहुंचाया जा सके।
कई दिनों तक झुंड से मिलाने का प्रयास
वन विभाग की टीम ने शावक को उसके हाथी दल तक पहुंचाने के लिए लगातार निगरानी और ट्रैकिंग की। करीब दो से तीन दिनों तक विशेष रूप से उसकी गतिविधियों पर नजर रखी गई और संभावित हाथी दल की तलाश की गई।
हालांकि तमाम प्रयासों के बावजूद शावक अपने झुंड से दोबारा नहीं मिल सका। लगातार अकेले रहने के कारण उसकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर वन विभाग की चिंता बढ़ती गई।
विशेषज्ञों की मदद से किया गया सुरक्षित रेस्क्यू
झुंड से मिलाने के प्रयास सफल नहीं होने के बाद वन विभाग ने विशेषज्ञों की सहायता से शावक का रेस्क्यू किया। इसके बाद उसे सुरक्षित तरीके से रमकोला अभयारण्य भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
वन विभाग का उद्देश्य शावक को सुरक्षित वातावरण में रखकर उसकी आवश्यक देखभाल और स्वास्थ्य संबंधी निगरानी सुनिश्चित करना है। साथ ही उसकी स्थिति के अनुसार आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।






























