AAP में बड़ा राजनीतिक भूचाल—एक साथ 7 राज्यसभा सांसदों के अलग होने से सियासी हलचल तेज, विलय के दावे से मचा विवाद

SHARE:

संसद से पार्टी तक हड़कंप, AAP के अंदर टूट पर उठे गंभीर सवाल

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) में शुक्रवार को ऐसा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया जिसने पूरे देश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी। पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के अलग होने की खबर ने संगठन को गहरे संकट में डाल दिया है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।

“दो-तिहाई सांसद BJP में विलय कर रहे”—राघव चड्ढा का दावा

AAP सांसद राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बड़ा दावा करते हुए कहा कि राज्यसभा में मौजूद पार्टी के दो-तिहाई सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का फैसला लिया है। उनके अनुसार सभी सांसदों ने संविधान के प्रावधानों के तहत यह कदम उठाया है और इसकी सूचना राज्यसभा सभापति को भी दे दी गई है।

तीन सांसदों ने BJP में शामिल होने की पुष्टि की

इस राजनीतिक घटनाक्रम में राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल के नाम सामने आए हैं, जिन्होंने कथित तौर पर भाजपा अध्यक्ष से मुलाकात कर पार्टी में शामिल होने की पुष्टि की है। वहीं विक्रम सहनी ने भी खुलकर भाजपा का रुख अपनाने की बात कही है, जबकि बाकी सांसदों की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

स्वाति मालीवाल का अलग रुख, उठाए गंभीर सवाल

स्वाति मालीवाल ने AAP से अलग होने की बात तो कही, लेकिन भाजपा में जाने की पुष्टि नहीं की। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संगठन अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुका है। साथ ही उन्होंने अपने साथ हुई घटनाओं का भी उल्लेख किया।

राजनीतिक और कानूनी बहस तेज

इस पूरे मामले ने एंटी डिफेक्शन कानून को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। AAP के पास राज्यसभा में कुल 10 सांसद थे, जिनमें से 7 के अलग होने पर दो-तिहाई संख्या का मुद्दा उठ रहा है। पार्टी के भीतर इसे “विश्वासघात” बताया जा रहा है, जबकि चड्ढा इसे वैधानिक विलय बता रहे हैं।

भगवंत मान और संजय सिंह का तीखा रुख

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस घटनाक्रम पर कड़ा बयान देते हुए कहा कि पार्टी छोड़ने वाले नेता अपने दम पर कुछ नहीं कर सकते। वहीं AAP नेता संजय सिंह ने राज्यसभा सभापति को पत्र लिखकर सांसदों की अयोग्यता की मांग करने की बात कही है और इसे भाजपा की रणनीति करार दिया है।

AAP की अंदरूनी राजनीति को गहरे संकट में डाल दिया है, जबकि देश की राजनीति में भी नए समीकरण बनने की संभावनाएं तेज हो गई हैं।

Amit sahu
Author: Amit sahu

Leave a Comment

सबसे ज्यादा पड़ गई