तहसीलदार माया अंचल लहरे के निलंबन पर हाईकोर्ट की रोक, शासन से मांगा जवाब

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पुसौर तहसील में सरकारी जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव से जुड़ा मामला, 16 जुलाई 2026 के निलंबन आदेश पर अंतरिम राहत

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कांकेर में पदस्थ तहसीलदार माया अंचल लहरे को बड़ी राहत देते हुए उनके निलंबन आदेश पर रोक लगा दी है। शासन ने उन्हें 16 जुलाई 2026 को निलंबित किया था। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

पुसौर तहसील से जुड़ा है मामला

मामला उस समय का है, जब माया अंचल लहरे रायगढ़ जिले की पुसौर तहसील में तहसीलदार के पद पर पदस्थ थीं। उनके कार्यकाल के दौरान सरकारी जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज विवरण में बदलाव किए जाने का आरोप सामने आया था।

प्रकरण के अनुसार, खसरा नंबर 16/2ख, जिसे राजस्व रिकॉर्ड में ‘छोटे झाड़ के जंगल’ मद की शासकीय भूमि बताया गया था, उसके संबंध में 28 अक्टूबर 2020 को आदेश जारी किया गया। आरोप है कि इस आदेश के जरिए भूमि के रिकॉर्ड से सरकारी मद हटाकर आनंद राम का नाम दर्ज करने का निर्देश दिया गया।

राजस्व मंडल में पहुंचा मामला

तहसीलदार के इस आदेश के खिलाफ छत्तीसगढ़ राजस्व मंडल, बिलासपुर में पुनरीक्षण आवेदन प्रस्तुत किया गया। मामले की सुनवाई के बाद राजस्व मंडल ने 21 अगस्त 2025 को अपने आदेश में तहसीलदार को सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना सरकारी जमीन का मद बदलने के लिए जिम्मेदार माना।

राजस्व मंडल की ओर से तहसीलदार के साथ संबंधित हल्का पटवारी के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई किए जाने के लिए शासन को पत्र भेजा गया था।

16 जुलाई को किया गया था निलंबित

राजस्व मंडल की कार्रवाई के बाद शासन स्तर पर मामले को लेकर विभागीय प्रक्रिया आगे बढ़ी और 16 जुलाई 2026 को माया अंचल लहरे को निलंबित कर दिया गया।

निलंबन आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने फिलहाल निलंबन आदेश पर रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है।

आगे की कार्रवाई पर नजर

हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद अब मामले में शासन और संबंधित अधिकारियों के जवाब महत्वपूर्ण होंगे। अदालत के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों और जवाब के आधार पर आगे की सुनवाई में निलंबन तथा मूल राजस्व विवाद से जुड़े पहलुओं पर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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