रायपुर। छत्तीसगढ़ में अब पुराने श्रम कानूनों को दरकिनार करते हुए नई मजदूर संहिता लागू होगी। खास बात ये है कि इस नियम के मुताबिक अब न्यूनतम मजदूरी का निर्धारण वैज्ञानिक आधार पर होगा। यही नहीं, रोटी कपड़ा, मकान, बच्चों की शिक्षा और इलाज के खर्च के आधार पर मजदूरी तय की जाएगी।
एक और अहम बात ये कि, अब पूरे देश के लिए तय न्यूनतम मजदूरी से कम राशि कहीं नहीं दी जा सकेगी। न्यूनतम वेतन सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होगा, चाहे उनकी आयु या लिंग कुछ भी हो।
चार श्रेणियों में बटेंगे श्रमिक
श्रमिकों को उनके कौशल और अनुभव के आधार पर चार मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है। अकुशल- वे कार्य जिनमें केवल परिचालन अनुभव की आवश्यकता होती है। अर्द्धकुशल वे कार्य जो कौशल और पर्यवेक्षण के साथ किए जाते हैं। कुशल तकनीकी प्रशिक्षण और विवेकपूर्ण निर्णय वाले कार्य । अत्यधिक कुशल यानि वे कार्य जिनमें विशिष्ट स्तर की निपुणता और गहन तकनीकी अनुभव अनिवार्य है।
न्यूनतम वेतन निर्धारण के नए मानक
परिवार आधारित उपभोग इकाई, न्यूनतम मजदूरी की गणना एक मानक श्रमिक वर्ग परिवार को आधार मानकर की जाएगी। इस परिवार में कामगार के अलावा उसका पति या पत्नी और दो बच्चे शामिल होंगे। इसे कुल तीन वयस्क उपभोग इकाइयों के बराबर माना गया है। आहार और पोषण संबंधी मानक श्रमिक के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए, प्रति दिन प्रति उपभोग इकाई के लिए शुद्ध 2700 कैलोरी की खपत का मानक रखा गया है। वस्त्र और आवास प्रति मानक श्रमिक परिवार के लिए प्रति वर्ष 66 मीटर कपड़ा निर्धारित किया गया है। आवास- भोजन और वस्त्र पर होने वाले कुल व्यय का 10 प्रतिशत आवासीय किराए के रूप में वेतन गणना में जोड़ा जाएगा।
ये है मामला
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के श्रमिक हितों को ध्यान में रखते हुए मजदूरी संहिता (छत्तीसगढ़) नियम, 2026 का प्रारूप तैयार कर लिया है। इसके साथ ही राज्य में वर्षों से चले आ रहे पुराने न्यूनतम वेतन और वेतन भुगतान नियमों को बदलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नया नियम लागू होते ही राज्य में दो प्रमुख पुराने नियम समाप्त हो जाएंगे। इनमें न्यूनतम वेतन (छत्तीसगढ़) नियम, 1958, छत्तीसगढ़ वेतन भुगतान नियम, 1962 शामिल हैं।














































