नवा रायपुर जंगल सफारी में दुर्लभ पक्षी की दस्तक, बॉटेनिकल गार्डन में दिखा ब्राउन-कैप्ड पिग्मी वुडपैकर

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नवा रायपुर, 17 जून 2026। नवा रायपुर स्थित जंगल सफारी नवा रायपुर के बॉटेनिकल गार्डन में पक्षी प्रेमियों और वन्यजीव छायाकारों के लिए एक महत्वपूर्ण और सुखद खोज सामने आई है। हाल ही में आयोजित बर्ड वॉक के दौरान भारत के सबसे छोटे कठफोड़वों में से एक ब्राउन-कैप्ड पिग्मी वुडपैकर (Brown-capped Pygmy Woodpecker) को कैमरे में कैद किया गया।


तेजी से विकसित शहरी क्षेत्र में दुर्लभ उपस्थिति

शहरीकरण के बीच इस दुर्लभ पक्षी की मौजूदगी को जैव विविधता संरक्षण के लिहाज से एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह दिखाता है कि जंगल सफारी और बॉटेनिकल गार्डन का पारिस्थितिकी तंत्र वन्यजीवों के लिए अनुकूल होता जा रहा है।


वन विभाग के प्रयासों से बन रहा सुरक्षित आवास

केदार कश्यप के मार्गदर्शन में विकसित यह क्षेत्र अब वन्यजीव संरक्षण का महत्वपूर्ण केंद्र बनता जा रहा है। यहां का हरित वातावरण और संरक्षण उपाय कई पक्षी प्रजातियों को सुरक्षित आवास प्रदान कर रहे हैं।


ब्राउन-कैप्ड पिग्मी वुडपैकर की खासियत

यह पक्षी भारत के सबसे छोटे कठफोड़वों में शामिल है, जिसकी लंबाई लगभग 13 से 15 सेंटीमीटर होती है। इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं:

  • भूरे रंग का सिर (ब्राउन कैप)
  • काले-सफेद धब्बेदार पंख
  • पेड़ों पर तेज गति से चढ़ने-उतरने की क्षमता

पेड़ों का प्राकृतिक संरक्षक

यह पक्षी पेड़ों की छाल में मौजूद कीट और लार्वा खाकर प्राकृतिक रूप से पेड़ों की रक्षा करता है। इसी वजह से इसे “प्राकृतिक कीट नियंत्रक” भी कहा जाता है, जो पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।


जैव विविधता संरक्षण की बड़ी उपलब्धि

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी शहरी क्षेत्र के भीतर इस तरह की प्रजाति का दिखाई देना यह साबित करता है कि जंगल सफारी क्षेत्र में प्राकृतिक वातावरण मजबूत हो रहा है। यह उपलब्धि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों की सफलता का संकेत है।


पर्यावरण जागरूकता को मिलेगा बढ़ावा

इस दुर्लभ पक्षी की मौजूदगी न केवल छत्तीसगढ़ की जैव विविधता को समृद्ध करती है, बल्कि लोगों को प्रकृति संरक्षण, हरित विकास और वन्यजीव सुरक्षा के प्रति भी जागरूक करती है।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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