इतिहास रचने जा रहीं निर्मला सीतारमण, बजट से पहले कांग्रेस ने सरकार को क्यों घेरा?

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नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026 से ठीक पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर नीति निर्धारण में तालमेल की कमी का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया है कि जब बजट पेश होने के कुछ ही दिनों बाद जीडीपी और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) की नई श्रृंखला जारी होनी है, तो क्या बजट के आंकड़े तुरंत संशोधित किए जाएंगे


1 फरवरी को पेश होगा निर्मला सीतारमण का रिकॉर्ड नौवां बजट, आर्थिक नीतियों पर टिकी देश की नजर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार, 1 फरवरी 2026 को अपना रिकॉर्ड नौवां केंद्रीय बजट पेश करेंगी, जिसमें दो अंतरिम बजट भी शामिल हैं। यह बजट ऐसे दौर में आ रहा है, जब सरकार राजकोषीय नीति के नए मानकों की ओर बढ़ रही है और आर्थिक दिशा को लेकर व्यापक बहस चल रही है।


राजकोषीय घाटे की जगह ऋण-जीडीपी अनुपात को केंद्र में लाने की तैयारी

आगामी आम बजट में सरकार किसी निश्चित राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के बजाय ऋण-जीडीपी अनुपात को कम करने पर ज़ोर दे सकती है, जो फिलहाल लगभग 56 प्रतिशत है।
सरकार का मानना है कि देश एफआरबीएम कानून में निर्धारित राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के मार्ग के अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

भारत जैसी तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए 3 से 4 प्रतिशत का राजकोषीय घाटा संतुलित और व्यावहारिक माना जाता है। संशोधित एफआरबीएम अधिनियम के तहत 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी के 4.5 प्रतिशत से नीचे रखने की बात कही गई थी।


सरकार का नया पैमाना: कठोर घाटा लक्ष्य नहीं, घटता ऋण-जीडीपी अनुपात

सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब वह हर साल सख्त घाटा लक्ष्य तय करने के बजाय ऋण-जीडीपी अनुपात को राजकोषीय प्रदर्शन का प्रमुख संकेतक बनाएगी।
1 फरवरी 2025 को जारी एफआरबीएम वक्तव्य में अगले छह वर्षों के राजकोषीय रोडमैप का मसौदा पेश किया गया था।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जुलाई 2024 के बजट भाषण में कहा था कि 2021 में अपनाए गए राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के मार्ग ने अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है और सरकार घाटे को 4.5 प्रतिशत से नीचे लाने के लक्ष्य पर कायम है। उन्होंने यह भी कहा था कि 2026-27 के बाद हर साल ऐसा प्रयास होगा जिससे केंद्र सरकार का ऋण-जीडीपी अनुपात घटता जाए


बजट से पहले कांग्रेस का तीखा हमला, आंकड़ों में बदलाव को लेकर जताई आशंका

कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने शनिवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 का बजट रविवार को पेश किया जाएगा, जबकि कुछ ही दिनों बाद महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों की नई श्रृंखला आने वाली है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें असमंजस में हैं कि बजट में उनके लिए क्या प्रावधान होंगे, खासकर तब जब सरकार 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें लागू करने की घोषणा करने जा रही है।


16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को लेकर राज्यों की बढ़ी चिंता

जयराम रमेश ने बताया कि वित्त आयोग का गठन संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत किया जाता है, जो केंद्र द्वारा एकत्र कर राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी और उसके वितरण की सिफारिश करता है।
16वां वित्त आयोग वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि से जुड़ी सिफारिशें देगा, जिस पर राज्यों की आर्थिक निर्भरता टिकी होती है।


नई जीडीपी और सीपीआई श्रृंखला से बजट अनुमानों पर पड़ सकता है असर

कांग्रेस नेता ने पहली बड़ी चिंता यह जताई कि बजट के कई आंकड़े जीडीपी के प्रतिशत के रूप में पेश किए जाएंगे, जबकि 27 फरवरी 2026 को 2022-23 को आधार वर्ष मानकर नई जीडीपी श्रृंखला जारी होने वाली है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या 1 फरवरी को पेश किए गए बजट आंकड़ों में जल्द ही संशोधन करना पड़ेगा

दूसरी चिंता 12 फरवरी 2026 को जारी होने वाली नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) श्रृंखला को लेकर है, जिसका आधार वर्ष 2024 होगा। रमेश के अनुसार, यदि इसमें खाद्य कीमतों की हिस्सेदारी घटती है, तो इसका सीधा असर बजट अनुमानों पर पड़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में संशोधन की प्रक्रिया भी चल रही है।


नीति-निर्धारण में तालमेल की कमी का संकेत दे रहा पूरा घटनाक्रम: कांग्रेस

कांग्रेस का कहना है कि बजट से पहले आर्थिक सूचकांकों में संभावित बदलाव यह दर्शाते हैं कि नीति-निर्धारण के स्तर पर समन्वय की कमी है, जिससे बजट की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

Amit sahu
Author: Amit sahu

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