करवा चौथ पर छन्नी से ही क्यों देखते हैं चांद? जानिए चंद्र दर्शन से जुड़ी पौराणिक मान्यता

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करवा माता और शिव-पार्वती की पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर खोला जाता है व्रत, गणेश जी की उपासना से जुड़ी है छन्नी से दर्शन करने की परंपरा

नई दिल्ली। करवा चौथ का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन की खुशहाली की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को भगवान शिव, माता पार्वती और करवा माता की पूजा करने के बाद चंद्रमा के दर्शन किए जाते हैं और उन्हें अर्घ्य अर्पित कर व्रत खोला जाता है। इस दौरान महिलाएं अक्सर छन्नी से चंद्रमा को देखती हैं। इसके पीछे धार्मिक आस्था और पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।

चतुर्थी तिथि पर चंद्र दर्शन को लेकर क्या है मान्यता?

ज्योतिषाचार्य पंडित मनोज त्रिपाठी के अनुसार, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर भगवान गणेश की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि गणेश जी की उपासना से परिवार में सुख-समृद्धि आती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

पौराणिक मान्यताओं में चतुर्थी तिथि को ‘रिक्ता’ और ‘खला’ भी कहा गया है। कुछ धार्मिक परंपराओं में इस तिथि पर चंद्रमा को सीधे देखने से अपयश या कलंक लगने की आशंका मानी जाती है। इसी मान्यता के चलते चतुर्थी पर चंद्र दर्शन को लेकर विशेष सावधानी बरतने की परंपरा प्रचलित है।

छन्नी से चंद्रमा देखने की परंपरा क्यों?

करवा चौथ पर महिलाएं छन्नी के माध्यम से चंद्रमा के दर्शन करती हैं और फिर उसी छन्नी से पति का चेहरा देखती हैं। कुछ परंपराओं में पानी में चंद्रमा की परछाईं देखकर अर्घ्य देने की विधि भी अपनाई जाती है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, चतुर्थी पर गणेश जी की पूजा करने के बाद चंद्रमा को नीची निगाह से अर्घ्य देने की परंपरा है। माना जाता है कि इससे चंद्र दर्शन से जुड़ा अपयश का दोष दूर होता है। इसी विश्वास के कारण करवा चौथ की पूजा में छन्नी का विशेष स्थान है।

करवा चौथ पर चंद्र दर्शन का विशेष महत्व

करवा चौथ का व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही पूरा माना जाता है। महिलाएं चंद्रमा को जल अर्पित करती हैं और पति की लंबी आयु तथा दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना करती हैं। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत खोलने की परंपरा है।

करवा चौथ पर छन्नी से चंद्र दर्शन करना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही धार्मिक आस्था और वैवाहिक परंपरा का प्रतीक है।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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