जगदलपुर। बस्तर ब्लॉक के कचनार लैम्स से सरकारी खाद वितरण को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। कचनार गांव के एक किसान के नाम पर कथित तौर पर जाली हस्ताक्षर कर 11 हजार 359 रुपये का खाद निकालने और उसकी राशि किसान के लोन खाते में दर्ज करने का आरोप लगा है। किसान को इसकी जानकारी बैंक खाते का स्टेटमेंट देखने के बाद हुई। शिकायत सामने आने के बाद लैम्स प्रबंधन ने संबंधित राशि किसान के खाते में वापस जमा कर दी है।
खाद के लिए चक्कर लगाते रहे किसान
मामला कचनार गांव के किसान श्यामलाल कश्यप से जुड़ा है। किसान का आरोप है कि खेती के लिए सरकारी खाद लेने वह कई महीनों तक कचनार लैम्स के चक्कर लगाते रहे। इस दौरान कभी स्टॉक नहीं होने तो कभी खाद खत्म हो जाने की बात कहकर उन्हें वापस लौटा दिया गया।
किसान के मुताबिक, उन्हें खाद नहीं मिल पाया, लेकिन बाद में बैंक खाते का स्टेटमेंट देखने पर पता चला कि उनके नाम पर 11,359 रुपये का खाद निकाला गया है और इसकी राशि उनके लोन खाते में चढ़ा दी गई है।
शिकायत के बाद खाते में लौटाई गई राशि
मामले की जानकारी मिलने के बाद किसान ने इस पर आपत्ति जताई। शिकायत सामने आने के बाद लैम्स प्रबंधन ने संबंधित राशि किसान के खाते में वापस जमा कर दी। हालांकि, किसान के नाम पर खाद किसने और किन परिस्थितियों में निकाला, कथित हस्ताक्षर कैसे किए गए तथा इस मामले में जिम्मेदारी किसकी है, इन सवालों पर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
खाद वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल
इस मामले ने सरकारी खाद वितरण की प्रक्रिया और किसानों के खातों में दर्ज लेनदेन की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। किसान को खाद नहीं मिलने के बावजूद उसके नाम पर राशि दर्ज होने के आरोप की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदारी तय की जा सके।
किसान को राशि वापस मिलना राहत की बात है, लेकिन पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने और खाद वितरण व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आरोपों की जांच अहम होगी।






























