मोहम्मद शमी ने 100वें फर्स्ट क्लास मैच को बनाया यादगार, बोले- उम्र बढ़ी है लेकिन क्रिकेट की भूख नहीं

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दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईस्ट जोन की जीत में निभाई अहम भूमिका, चेपॉक में गेंद से दिखाया दम

चेन्नई। भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी ने अपने करियर के 100वें फर्स्ट क्लास मैच को यादगार बना दिया। दलीप ट्रॉफी के फाइनल में ईस्ट जोन की जीत में अहम योगदान देते हुए शमी ने इस खास मुकाबले में गेंद से प्रभावशाली प्रदर्शन किया और टीम को खिताब दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

100वें मुकाबले में शानदार प्रदर्शन

चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम यानी चेपॉक में खेले गए दलीप ट्रॉफी फाइनल में शमी ने गेंदबाजी से अपनी छाप छोड़ी। करियर के 100वें फर्स्ट क्लास मुकाबले में उनका प्रदर्शन खास रहा और टीम की जीत के साथ यह उपलब्धि और भी यादगार बन गई।

36 की उम्र पार, फिर भी कम नहीं हुई क्रिकेट की भूख

मैच के बाद शमी ने अपने क्रिकेट करियर और जुनून को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने संकेत दिया कि उम्र भले ही 36 वर्ष के पार पहुंच गई हो, लेकिन क्रिकेट खेलने की उनकी इच्छा और मैदान पर योगदान देने का जज्बा अभी भी पहले जैसा ही है।

शमी के लिए हर मुकाबला केवल व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि टीम की जिम्मेदारी निभाने और अपने प्रदर्शन को अगले स्तर तक ले जाने का अवसर है।

ईस्ट जोन को चैंपियन बनाने में अहम योगदान

दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईस्ट जोन की जीत के साथ शमी ने अपने 100वें फर्स्ट क्लास मैच को एक खास उपलब्धि में बदल दिया। उनके अनुभव और गेंदबाजी ने टीम को महत्वपूर्ण मुकाबले में मजबूती दी।

शमी का यह प्रदर्शन बताता है कि लंबे करियर और उम्र के बावजूद प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में उनकी भूख और प्रभाव अभी भी कायम है।

Amit sahu
Author: Amit sahu

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