सूरजपुर के मुख्यमंत्री DAV स्कूल में RTE छात्रों से पुताई और निर्माण कार्य कराने का मामला सामने आया है। हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर शिक्षा सचिव से 11 मार्च तक शपथपत्र के साथ जवाब मांगा है। जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित।
CG Surajpur RTE Student Safai Controvercy: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में मुख्यमंत्री DAV पब्लिक स्कूल तिलसिवा में शिक्षा का अधिकार कानून के तहत पढ़ने वाले बच्चों से निर्माण कार्य और रंगाई पुताई कराने का मामला सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
मामले को गंभीर मानते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई की और स्कूल शिक्षा सचिव से शपथपत्र के साथ जवाब तलब किया है।

स्वतः संज्ञान लेकर हुई सुनवाई
मूल रूप से आरटीई से जुड़ी जनहित याचिका समेत अन्य याचिकाओं पर 11 मार्च को सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन गरीब छात्रों से पुताई कराने की खबर सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने सोमवार को ही मामले की सुनवाई की।
कोर्ट ने राज्य शासन से विस्तृत जानकारी मांगी है और 11 मार्च 2026 तक शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इसी बीच रायगढ़ के प्री मेट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास में छात्राओं से रंगाई पुताई कराए जाने का मामला भी सामने आया, जिसमें एक महिला कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया है।
वीडियो में दिखे बच्चे करते निर्माण कार्य
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में स्कूली बच्चे सीमेंट और रेत का मसाला बनाते नजर आ रहे हैं। आरोप है कि छात्रों से स्कूल परिसर में निर्माण कार्य, सफाई और कक्षाओं की पुताई कराई गई। परिजनों का कहना है कि यह काम खासतौर पर आरटीई के तहत पढ़ने वाले गरीब छात्रों से कराया गया। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि जो छात्र काम करने से मना करते थे, उन्हें ट्रांसफर सर्टिफिकेट काटने की धमकी दी जाती थी।
प्रिंसिपल पर अभद्र व्यवहार के आरोप
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक जब वे इस मामले को लेकर स्कूल पहुंचे तो प्रिंसिपल ने अभद्र व्यवहार किया। आरोप है कि उन्होंने कहा कि बच्चों को मुफ्त में बैग, किताबें, टेबल और बिजली मिल रही है, इसलिए सवाल न उठाएं और गेट के बाहर जाकर बात करें।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि स्कूल की एक कक्षा का उपयोग प्रिंसिपल अपने पति के साथ आवास के रूप में कर रही हैं। परिजनों ने बच्चों के काम करते हुए फोटो और वीडियो साक्ष्य के रूप में कलेक्टर को सौंपे हैं।














































