Jindal Jan Sunwai Virodh : जिंदल की प्रस्तावित जनसुनवाई का ऐतिहासिक विरोध, 14 गांवों के हजारों ग्रामीण ठिठुरती ठंड में रतजगा

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Jindal Jan Sunwai Virodh : ठिठुरती रातों में भी आंदोलन जारी 
तमनार क्षेत्र में Jindal Jan Sunwai Virodh चरम पर है, जहां 14 गांवों के हजारों ग्रामीण खुले आसमान के नीचे कड़ाके की ठंड में रतजगा कर रहे हैं। जिंदल पावर लिमिटेड की कोयला खदान (Gare Palma Sector-I) से जुड़ी 8 दिसंबर की प्रस्तावित जनसुनवाई को ग्रामीण पूरी तरह अस्वीकार कर चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार वे जनसुनवाई का टेंट तक नहीं लगने देंगे।


Jindal Jan Sunwai Virodh : जल-जंगल-जमीन बचाने की लड़ाई 
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि उनकी लड़ाई Jindal Jan Sunwai Virodh, को केंद्र में रखकर आगे बढ़ रही है। उनका आरोप है कि लगातार खदानें खुलने से क्षेत्र में रोजगार, पर्यावरणीय संतुलन और भविष्य के जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ चुका है। आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा को देखते हुए उन्होंने जनसुनवाई का पुरजोर विरोध करने का निर्णय लिया है।


Jindal Jan Sunwai Virodh : खदान से 20 गांवों पर संकट का दावा 
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जिंदल को खदान आवंटित होती है, तो आसपास के 15 से 20 गांव गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। पहले से होने वाले विस्थापन और पर्यावरणीय हानि के चलते ग्रामीणों में भय और असंतोष बढ़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें विस्थापन, मुआवजा और रोजगार संबंधी कोई भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही।


Jindal Jan Sunwai Virodh : पूर्व में निरस्त हुई थी जनसुनवाई 
ग्रामीण कलेक्ट्रेट जाकर विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं तथा ज्ञापन सौंपकर जनसुनवाई रद्द कराने की मांग की थी, जिसके बाद इसे पहले अस्थायी रूप से निरस्त किया गया था। अब दोबारा प्रस्तावित जनसुनवाई को लेकर प्रशासन और कंपनी प्रबंधन सक्रिय हो गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष और बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह लड़ाई केवल आज की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व का प्रश्न है।


Jindal Jan Sunwai Virodh : दमनकारी नीतियों का आरोप 
ग्रामीणों ने मीडिया को तहसीलदार रायगढ़ का लिखित आदेश दिखाते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन उन्हें डराने और आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना है कि एक ओर सरकार जनसुनवाई को संवाद के रूप में पेश करती है, दूसरी ओर विरोध करने वालों पर दबाव बनाती है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि आंदोलन का नेतृत्व करने वाले कुछ राजनीतिक नेता अब मैदान छोड़ चुके हैं, जिससे आंदोलन पूरी तरह जनता के हाथों में आ गया है।


Jindal Jan Sunwai Virodh : धौराभाठा बना संघर्ष का केंद्र 
धौराभाठा मैदान में ग्रामीणों का कहना है कि वे तभी घर लौटेंगे जब जनसुनवाई निरस्त होगी। रातभर जलती अलाव, खुले मैदान में बैठकें और लगातार रणनीति निर्माण इस आंदोलन को ऐतिहासिक स्वरूप दे रहा है। Jindal Jan Sunwai Virodh अब तमनार के ग्रामीणों की एकजुटता और जल-जंगल-जमीन बचाने की दृढ़ संकल्पना का प्रतीक बन गया है।

 

Amit sahu
Author: Amit sahu

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